खास खबर

30 हाल की खबरें

खास खबर

मां ने कहा- ‘पता कर, सच में मिला क्या...!’

मां ने कहा- ‘पता कर, सच में मिला क्या...!’

“जब फोन आया और बताया कि लता मंगेशकर पुरस्कार के लिए मुझे चुना है, तो यकीन नहीं हुआ। मेरी मां ने कहा कि पता करो क्या सच में तुम्हें ही दे रहे हैं, तब मैंने कहा कि लग तो ऐसा ही रहा है। सच कहूं तो मुझे यकीन नहीं था। खय्याम साहब से शुरू हुआ और मेरा नाम... किसी चमत्कार से कम नहीं है। लता जी की आवाज को सुनकर बड़ा हुआ और जिस शहर में मैंने कई कार्यक्रम किए, उसी में मुझे ये सम्मान मिलना मेरे लिए सरप्राइज है।” इंदौर कितनी बार आए हैं? मेरे दोस्त स्वानंद किरकिरे के साथ कई बार आया हूं। कार्यक्रम भी किए हैं। मासूम शहर है। मैं चूंकि लखनऊ का हूं, इसलिये ऐसा माहौल बहुत मिस करता हूं। क्या लताजी से मुलाकात हुई? लताजी के गाने सुनकर बड़ा हुआ। जब बड़ा हुआ, तो सलिल चौधरी से मुलाकात हुई। सलिल दा ने लताजी से बेमिसाल गाने गवाए। जब भारतीय सिनेमा के सौ साल पूरे हुए, तब एक गाना बनाने की जिम्मेदारी मुझे दी गई, जिसमें बीस गायकों को गवाना था और उसी सिलसिले में लताजी से मुलाकात हुई। इस बात को पन्द्रह साल हो गए हैं। तय हुआ कि स्टूडियो में मुलाकात होगी। मुझे रातभर नींद नहीं आई। चार लाइन की रिकार्डिंग थी। वो आईं और बोलीं कि आप मेरे संगीतकार हैं, आप जो दिखाएंगे, उसी पर चलूंगी। यह मत सोचना कि लता मंगेशकर हूं और संकोच मत करना। मुझसे बंगाली में बात कर रही थीं। मैंने पूछा बंगाली कैसे आती है, तो बोलीं कि इंडस्ट्रीज में ज्य

प्रमुख खबरें

बिग बॉस में रीति का खुलासा

खास खबर

बिग बॉस में रीति का खुलासा

भाजपा सांसद मनोज तिवारी की बेटी रीति तिवारी ने ‘बिग बॉस 20’ में बताया कि तलाक होने के बाद पिता दूर हो गए थे। फोन आने के बावजूद माता-पिता के झगड़ों की वजह से बात नहीं कर पाती थीं और साल में केवल एक बार मिलती थीं। रीति ने बताया कि 18–19 साल की उम्र में खुद फैसला किया कि पिता के साथ और समझेंगी कि कैसे इंसान हैं लेकिन तब तक कई साल निकल चुके थे। मनोज तिवारी की दौलत, शोहरत और उन्हें मिलने वाले मौके रीति तक नहीं पहुंचे। उन्हें पिता का नाम और सम्मान मिलता है। रीति ने बताया कि मनोज तिवारी ने शुरुआत में ही साफ कर दिया था कि मदद नहीं करेंगे। हुनर है तो अपने दम पर आगे बढ़ना होगा। रीति को महीने के 20 से 25 हजार रुपये मिलते थे लेकिन पूरे महीने का खर्च आसान नहीं था। कई बार दिन में दो बार वड़ा पाव खाती थीं। मनोज तिवारी और पहली पत्नी रानी तिवारी का तलाक 2012 में हुआ था। रीति की परवरिश मां ने की। रीति गायक हैं, गायिका हैं, गीत लिखती और संगीत भी देती हैं। उनका कहना है कि लोग उन्हें बड़े नेता और मशहूर कलाकार की बेटी समझकर सुविधाओं में पली लड़की मानते हैं लेकिन उनकी जिंदगी लोगों की सोच से काफी अलग रही है।

‘वेलकम’ के बल्लू... अलविदा!

खास खबर

‘वेलकम’ के बल्लू... अलविदा!

फिल्म ‘वेलकम’ के बल्लू का नाम शायद याद न हो लेकिन चेहरा सामने आते ही किरदार याद आ जाते थे। कभी पुलिस, नौकर, पड़ोसी और कभी अपनी अजीब हरकतों से हंसाने वाला। किरदार छोटा हो या बड़ा अदाकारी से उसकी अलग पहचान बना देते थे। फिल्म ‘वेलकम’ में बल्लू का उनका किरदार मशहूर हुआ। फिल्म का डायलॉग ‘मेरी एक टांग नकली है...’ आज भी सोशल मीडिया पर खूब सुनाई देता है। मुश्ताक खान ने ‘आशिकी’, ‘सड़क’, ‘दिल है कि मानता नहीं’, ‘हम हैं राही प्यार के’, ‘हेरा फेरी’, ‘गदर’, ‘जोड़ी नंबर वन’, ‘मुझसे शादी करोगी’, ‘वेलकम’, ‘गदर-2’ और ‘स्त्री-2’ जैसी कई फिल्मों में काम किया। साथ टीवी और थिएटर में भी लगातार सक्रिय रहे। कुछ दिन पहले तक शूटिंग कर रहे थे और उनके कई नए काम भी आने वाले थे। हिंदी सिनेमा ने ऐसा कलाकार खो दिया जिसने छोटे-छोटे किरदार को यादगार बनाने में कसर नहीं छोड़ी।

जबान किसकी चलेगी आगे!

खास खबर

जबान किसकी चलेगी आगे!

मुकेश नायक को बदलने की बात होती रही है, लेकिन फैसला नहीं होता है। अब राहुल गांधी की ‘गूंज’ के बाद फिर गूंज है कि क्या कुछ होने वाला है। जीतू पटवारी पर नजर है कि जो चल रहा है, वही चलने देंगे? क्या अभय दुबे आएंगे? नाम प्रवीण पाठक का भी है, जिनकी दिल्ली में जमावट है, जिसकी वजह से प्रदेश के नेता उन्हें नजरअंदाज नहीं कर पाते हैं। पटवारी से इसलिए भाव मिलते रहते हैं कि ग्वालियर और आसपास के नेताओं को ठीक करना आसान रहता है। मुकेश नायक जब से आए हैं, जीतू से अलग गए नहीं हैं और उनकी बात को ताकत से आगे करते रहे हैं। बावजूद इसके उठापटक है और मामला जबान महकमे का है, इसलिए शोर ज्यादा है। अभय दुबे को लगता है कि पवन खेड़ा की जगह ले सकते हैं। हालांकि दूर की कौड़ी है, पर सियासत में कुछ भी सोचा जा सकता है। दिल्ली में पकड़ तो बना ली है और भोपाल में लगातार दिख रहे हैं। अब क्या नतीजा निकलेगा, आगे पता चलेगा, पर जबान कौन चलाएगा, इसको लेकर कई जबानें चल रही हैं!

देर कर दी आते-आते!

खास खबर

देर कर दी आते-आते!

हितानंद शर्मा के बाद से संगठन मंत्री की कुर्सी खाली थी, जिसकी वजह से भाजपा को नुकसान हो रहा था। बिना संगठन मंत्री के काम तो हो रहा था, लेकिन जैसा होता रहा है, वैसा नहीं था। कई तरह के पंगे थे, जिन्हें सुलझाने वाला कोई नहीं था। इधर-उधर से नेता भेजे जा रहे थे। ऊपर से भी कुछ को छोड़ा गया, जिन्होंने बात बनाने की कोशिश की, लेकिन बात बन नहीं रही थी। पुराना सिस्टम याद किया जा रहा था, जिसकी आखिरकार सुनवाई हुई है और चंद्रशेखर को मध्यप्रदेश भेज दिया गया है। हालांकि अभी आए नहीं हैं, लेकिन उनके काम करने का तरीका पहले ही आ गया है। राजस्थान में उन्होंने जो किया था, क्या वही मध्यप्रदेश में होगा? इसका पता आगे चलेगा कि यहां कैसे और क्या करते हैं। लेकिन नेताओं ने संगठन मंत्री के ना रहने के दौरान जो जोड़-तोड़ कर ली थी और अपने-अपने फायदे-नुकसान के दरवाजे खोल लिए थे, उन्हें फिर जमावट करना होगी। भाजपा में संगठन मंत्री ताकतवर होता है। सुभाष भगत और हितानंद शर्मा का जलवा सबने देखा है, जिन्होंने कई को बना दिया था, कई को पटका था। फिर इस बार तो चंद्रशेखर हैं, जो इस काम में माहिर रहे हैं। भाजपाई सियासत में हलचल है और सब ने चंद्रशेखर की कुंडली निकालना शुरू कर दी है कि कैसे पहुंचना है, क्या करना है और कैसे जगह बनाना है!

ताजा खबरें

आगे-आगे बोल, पीछे-पीछे खेद!

खास खबर

आगे-आगे बोल, पीछे-पीछे खेद!

मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बयान बेहिसाब हैं। महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों के बीच (जनवरी 2013) उन्होंने कहा था कि मर्यादा तोड़ी जाती है तो सीता हरण हो जाता है। हर एक के लिए लक्ष्मण रेखा है और उसे पार करने पर सामने रावण बैठा है। विवाद बढ़ा तो भाजपा को दूरी बनानी पड़ी और कैलाश को कहना पड़ा कि उनका मकसद किसी की भावना को ठेस पहुंचाना नहीं था। नीतीश कुमार के गठबंधन (2022) बदलने पर उन्होंने कहा कि विदेश में किसी ने उन्हें बताया था कि वहां लड़कियां जैसे बॉयफ्रेंड बदलती हैं वैसे ही बिहार की राजनीति है। मामला बिगड़ा तो सफाई आई कि मित्र की कही बात थी। साथ में यह भी आया कि नारी उनके लिए पूजनीय है। इंदौर के धार्मिक कार्यक्रम (अप्रैल 2023) में उन्होंने कहा कि लड़कियां इतने गंदे कपड़े पहनकर निकलती हैं कि उनमें शूपर्णखा लगती हैं। उसी भाषण में नशे में झूमते युवाओं को पांच-सात थप्पड़ लगाने की इच्छा भी जाहिर कर दी। जून 2025 में कपड़ों पर फिर राय दी। बोले कि उन्हें कम कपड़े पहनने वाली लड़कियां पसंद नहीं और ऐसी लड़कियां सेल्फी लेने आएं तो पहले ढंग के कपड़े पहनकर आने को कहते हैं। राहुल गांधी के अपनी बहन प्रियंका गांधी को चूमने (सितंबर 2025) पर भी उन्हें भारतीय संस्कृति खतरे में दिखाई दी। उन्होंने इसे संस्कारों का अभाव और विदेशी संस्कृति बता दिया। विरोध हुआ तो रिश्तों की पवित्रता और सीमा समझाने लगे। इं

बीज बबूल का... आम की चाह!

खास खबर

बीज बबूल का... आम की चाह!

बुद्ध ने शिष्य आनंद से कहा था- कुछ घोड़ों को अगर चाबुक से मारा जाए, वह ठिठक जाते हैं, जहां के तहां खड़े रहते हैं, जिद्दी होते हैं। कुछ घोड़े इशारा मिलते ही चल पड़ते हैं। कुछ ऐसे भी होते हैं, जिन्हें सिर्फ चाबुक की आवाज आए, दौड़ पड़ेंगे। ‘हेरत हेरत हे सखी, रहा कबीर हिराई।’ खोजने वाले को खोजा नहीं जा सकता, क्योंकि वह खोज में खो जाता है। कबीर हेरफेर करते, टेर लगाते खुद गूंज बन गए। अच्छे घोड़ों के लिए चाबुक की छाया ही काफी है। सियासी घोड़े किसी सीमा को नहीं मानते। वह बस दौड़ना जानते हैं। कौन सियासी घोड़ा अस्तबल में रहना चाहेगा। सबकी दौड़ सत्ता तक। मिल जाए तो जीवन सफल। ना मिले, फिर भी कुछ ना कुछ तो मिल ही जाता है। गालिब ना हो दुनिया में, तो कुछ ऐसा ज़रर (अफसोस नहीं), दुनिया हो और दुनिया में, मेरा बादशाह हो! सत्ता से दूर रह जाने वाले भी सरकार बनाने-बिगाड़ने के खेल में तो शामिल हो ही सकते हैं। खुद ना बन सको, अपना बादशाह बनवा दो। इतना तो हर सियासतदान कर ही लेता है। किंगमेकर से दोस्ती तो की ही जा सकती है। अखिलेश सरकार में ओ.पी. राजभर मंत्री ना बन सके तो आदित्यनाथ की सरकार में बन गए। रेवंत रेड्डी कभी संघी हुआ करते थे, अब तेलंगाना में कांग्रेस के मुख्यमंत्री हैं। और दुनिया को कांग्रेसी होने का मतलब समझा रहे हैं। भगवत भजन भी राजनीति में सत्तावंदन का ही दूसरा नाम है। सारा अध्यात्म, हर पूजा-पाठ

नाबीना...

खास खबर

नाबीना...

होर्डिंग के खिलाफ प्रहलाद पांडे धरने पर बैठे हैं और दैनिक भास्कर पहले पन्ने पर लिख रहा है कि पाटनीपुरा चौराहे पर अवैध होर्डिंग गिरा, जिसकी चपेट में बाइक सवार आ गए। लड़का घायल हो गया। धार्मिक आयोजन के लिए लगाया था। आठ दिन से लेफ्ट टर्न ब्लॉक हो रहा था, लेकिन गिरने के बाद ही इनको पता चला कि रास्ता ब्लॉक था। उससे पहले तो कोई खबर या तस्वीर नहीं थी। साथ ही हाइकोर्ट के फरमान का जिक्र है। जब होर्डिंग लगता है तो नेताओं की तस्वीर रहती है, जिसे देख नगर निगम बेबस हो जाता है और जो हर बात पर पहलवानी करते हैं, उनके भी हाथ-पैर फूल जाते हैं। यही वजह है कि जो जहां खड़ा होता है, उसे कोई हटा नहीं पाता है। पांडे से मारपीट करने वालों पर मुकदमा दर्ज कर लिया है। अब पत्नी भी अनशन पर बैठ गई हैं। शुरुआत में तो यहां खबर ही नहीं थी, आज पेज तीन की पहली खबर है। वैसे मुकदमा किन पर लगाया गया है, उनके नाम नहीं हैं। नईदुनिया ने गिरे होर्डिंग के साथ पांडे के आंदोलन को छापा है कि भूख हड़ताल कर रहे समाजसेवी की तबीयत बिगड़ गई है और गणेश उत्सव में लगा होर्डिंग गिर गया है। जो मुकदमा दर्ज किया है, उसे छोटे में निपटा दिया है। पत्रिका ने इसे बड़ी खबर बनाया है और नगर निगम की सुस्ती को सुर्खी दी है। पांडे से मारपीट के आठ दिन बाद मुकदमा दर्ज हुआ है और तबीयत बिगड़ने वाली बात भी खबर में शामिल है। विनोद अग्रवाल को नईदुनिया के ऊपर

मजहब नहीं सिखाता...!

खास खबर

मजहब नहीं सिखाता...!

यह बात अब शायद ही किसी की समझ में आए कि अजमेर शरीफ के उर्स में पहली कव्वाली हर बार शंकर शंभू की होती थी और सुनने के लिए लोग लालायित रहते थे। उस्ताद बिस्मिल्लाह खां साहब के दिन की शुरुआत ही काली मंदिर के दर्शन से होती थी। ‘मन तड़पत हरि दर्शन को आज...’ गीत गाने वाले मोहम्मद रफी हैं तो संगीतकार नौशाद और गीतकार शकील बदायूंनी। किसे याद है कि दिलीप कुमार का असली नाम युसूफ खान था। संजय खान नाम क्या आज कोई रख सकता है? मीना कुमारी या मधुबाला आज संभव है? सागर सरहदी को कितने लोग सागर सिंह तलवार के नाम से जानते हैं? अभी ही खबर छपी है कि कलावे बनाने का बड़ा काम मुस्लिम करते हैं और मथुरा की जन्माष्टमी के लिए मुस्लिम परिवार पोशाख तैयार करता है। ये सब होता रहा है आजादी के बाद से अब तक। अभी विदेश दौरे के समय संघ मुखिया मोहन भागवत ने यह जताने की कोशिश की कि सभी के सहयोग से ही देश की तरक्की संभव है और यह भी कि भारत में सभी धर्म, व्यक्ति, समाज समान हैं... तो फिर जब सहयोगी दल का व्यक्ति ही इस तरह की बातें करता है कि भेदभाव की चिरमिराती गंध आती है तो फिर क्यों नहीं उसे रोका जाता या उसके खिलाफ कार्रवाई होती या विरोध ही दर्ज कराया जाता? अभी भोपाल के विधायक ने कहा है कि गरबों में यदि मुस्लिम आना चाहते हैं तो बहनों को साथ लेकर आएं या यह शर्त लगाई जा रही है कि हर एक को पहले तिलक लगाना होगा, फिर अंदर आने देंग

कहीं दीप जले, कहीं दिल!

खास खबर

कहीं दीप जले, कहीं दिल!

प्रधानमंत्री के जन्मदिन से पहले टीवी पर भारतीय जनता पार्टी के सदस्य कह रहे थे कि नरेंद्र मोदी के लिए शाम छह और सात बजे के बीच ‘आशीर्वाद का दीया’ जरूर जलाना। आदेश समझ कर दीया जलाया। जलाते समय अखिलेश यादव से सुना कि देश के कई हिस्सों में बाढ़ से लोग तकलीफ में हैं। इसके बाद कई लोगों ने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री ने तेल बचाने के वास्ते इस्तेमाल कम करने को कहा था। जन्मदिन के पहले भारतीय जनता पार्टी के पदाधिकारियों और नरेंद्र मोदी के मंत्रियों से उनकी इतनी तारीफ सुनी कि खुशामद लगी। दिन भर समाचार चैनल देखना पत्रकारों के लिए जरूरी है। सोशल मीडिया पर ताजी खबर की तलाश में रहती हूं, सो उस दिन इतने लोग मोदी की तारीफ करते दिखे कि सोचने लगी कि उन्हें क्यों इस किस्म की खुशामद की जरूरत रहती है। शायद इसलिए कि... जब से कॉक्रोच जनता पार्टी वालों ने स्कूलों को ठीक करने के लिए मुहिम चलाई है, प्रधानमंत्री का भरोसा कम हो गया है! बारह बरस के मोदी के कार्यकाल में पहली बार अगर किसी ने उनका मजाक बनाने की हिम्मत दिखाई है तो ‘कॉक्रोचों’ ने। बार-बार रील दिखती हैं, जिसमें मोदी को निशाने पर रख कर नौजवान न सिर्फ हैं प्रधानमंत्री के मीम बनाते, बल्कि यह भी साबित करते हैं कि नेताओं की ताकत से डरते नहीं हैं। अभी तक होता यह था कि देश में कि प्रधानमंत्री की आलोचना चोरी-छिपे हुआ करती थी, क्योंकि मोदी ने कई बार जतलाया कि

अंधेरे के उस पार देखने का वक्त!

खास खबर

अंधेरे के उस पार देखने का वक्त!

कुछ छूट जाने के डर हैं, वरना मोदी भी संघ की तर्ज पर चलते। संघ के सौ बरस होने पर मोहन भागवत ने कहा था- इसमें ढिंढोरा पीटने या ताकत दिखाने जैसी कोई बात नहीं है। प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी ने भी कहा था- मैं जन्मदिन नहीं मनाता, न किसी से मिलता हूं, न फोन पर बात करता हूं, लेकिन अब यह सब हो रहा है। जंतर-मंतर के काले मंतर ने खेल की बिछात उलट-पलट दी है। अब ये भी चौंकाने वाला है कि दीया जलाओ, पच्चीस बरस की सेवा का जश्न मनाओ... आइडिया कौन दे रहा है! भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन ने तेज-तर्राट युवा नेताओं से लंबी बात की थी, जिसमें बूढे नेता अश्विनी वैष्णव थे, जो मौजूद चालीस नेताओं की मदद से नोट्स बना रहे थे, जिसका मकसद मोदी को यह बताना है कि किस तरह जेन-जी के साथ पटरी बैठ सकती है। तिलचट्टों की बात उसमें नहीं थी, लेकिन काम उनसे निपटने की तैयारी का ही था। माना जा रहा है कि यह आशीर्वाद का दीया उस बातचीत का ही फलसफा रहा, ताकि ऐसा इवेंट तैयार हो, जो पूरे सोशल मीड़िया मे छा जाए- दीये लगाते सेलिब्रिटी, आम लोग इंस्टा, ट्विटर पर टूट पड़ें। पूरा दावं इस मायने में फेल हो गया कि यह सिर्फ भाजपा का इवेंट हो गया। लोगों ने बाढ़ के बाद कीचड़ से सनी बस्तियों, खस्ताहाल स्कूलों, बदहाल अस्पतालों, बालाघाट में खसरे, मलेरिया से मौत में समाए बैगा आदिवासी बच्चों, जहरीली शराब से मातम में पसरे इलाकों को याद कर करके दीये ज

पिछड़ गईं विरोधी नेता!

खास खबर

पिछड़ गईं विरोधी नेता!

राहुल गांधी की गूंज सोनिला मिमरोट के लिए कुछ ठीक नहीं रही कि कहीं दिखी ही नहीं हैं। कुछ खास कर पाई हैं। कोशिश करती रहीं, लेकिन दूसरों की रफ्तार इतनी तेज नहीं थी कि वहां तक पहुंच नहीं पाईं। फिर सारा फुटेज रीना बौरासी खींच ले गईं, जिसकी वजह से दूसरी महिला नेताओं को कुछ मिल नहीं पाया। हालांकि सत्यनारायण सत्तन की लड़की कनुप्रिया को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, जो लगातार बनी थीं और सलीके से बात करती रहीं। सोशल मीडिया पर अब दिखने लगी हैं। रीना के बाद उन्हें रखा जा सकता है, लेकिन सोनिला का मामला कमजोर ही रहा है!

भारत का नाम काफी है

खास खबर

भारत का नाम काफी है

निकिता पोरवाल कहती हैं ‘भारत का नाम ही काफी है, पहचान बताने के लिए’। मिस वर्ल्ड, भारत की ओर से निकिता पोरवाल थीं। कहती हैं, लोगों की गलतफहमी दूर करना चाहती हूं कि सौंदर्य प्रतियोगिता वाली लड़कियां एक्टिंग नहीं कर सकती। प्रियंका चोपड़ा को आइडियल मानती हूं। फिल्मी परिवार ना होने के बावजूद, खुद की पहचान बनाई। बताती हैं, उज्जैन से हूं। छह साल का एक्टिंग कोर्स किया है। कन्नड़ फिल्म से शुरुआत कर रही हूं। सोच बदलना चाहती हूं कि सिर्फ खूबसूरती के बारे में नहीं जानती। अच्छी कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहती हूं।

विधायक नहीं आए तो अपाहिजों से साइकल ले ली!

खास खबर

विधायक नहीं आए तो अपाहिजों से साइकल ले ली!

पहले पन्ने पर पत्रिका लिख रहा है कि कैलाश विजयवर्गीय ने भाजपा पार्षद पर बॉडी शेविंग वाली ‘टिप्पणी’ की, अब उसे बताया बेटी जैसा। चारों तरफ घिरे तो माफी मांग ली है और वीडियो जारी कर कह रहे हैं कि मेरी विधानसभा के वार्ड की महिला पार्षद बेहद सक्रिय हैं। रविवार को मैंने भाषण में जो भी शब्द कहे, उसे कांग्रेस के लोगों ने गलत तरीके से उठाया। मेरी बेटी जैसी हैं। मैंने उन्हें बचपन में गोद में खिलाया है, इसलिए ना उनके मन में कुछ है और ना मेरे मन में, लेकिन कांग्रेस ने जिस तरीके से इसे उठाया, उससे दु:खी हूं और मेरी बेटी भी दु:खी है। मैं खेद प्रकट करता हूं। नईदुनिया ने पेज दो पर लिखा है कि महिला पार्षद पर ‘टिप्पणी’ के बाद घिरे कैलाश विजयवर्गीय ने मांगी माफी। मंत्री के साथ पार्षद ने भी बयान जारी किया है। दैनिक भास्कर ने कैलाश विजयवर्गीय ने जो बोला था, उससे तो कन्नी काट ली थी, लेकिन आज लिखा है कि भाजपा पार्षद पर ‘टिप्पणी’ के बाद मंत्री विजयवर्गीय ने जताया खेद कि वो मेरी बेटी जैसी हैं, लेकिन जो कहा था, नहीं छपा और बात दबाने में पूरी ताकत लगा दी है, जबकि नेशनल खबर बन गया था मंत्री का बयान। मेट्रो स्टेशन के लिए एक सौ साठ पेड़ कटेंगे। हाइकोर्ट ने पूछा कि रीगल टॉकीज परिसर खाली है, रानी सराय की जगह वहां स्टेशन क्यों नहीं बनाते... तो तोतों का घर उजाड़ने वाले अफसरों की दलील थी कि नए पौधे बड़े होंगे तो वहा

इस मेहरबानी की वजह!

खास खबर

इस मेहरबानी की वजह!

मनोज पटेल अगर कहीं ज्यादा दिखें तो समझ आ जाता है कि कोई बड़ी वजह है, वरना आसानी से बाहर आते नहीं हैं। युवा मोर्चा के ऑल इंडिया अध्यक्ष के साथ पूरे समय रहे। भरपूर कंपनी दी, जिसकी बातें इंदौर से लेकर बड़े गांव तक हो रही है कि क्या चाहते हैं। निकलकर साथ सियासत करने वाले विकास ठाकुर आ रहे हैं, जिन्हें दौरे का प्रभारी बना दिया गया था। ख्वाब युवा मोर्चा का गांव अध्यक्ष बनने का देख रहे हैं, जिसके लिए मनोज की फील्डिंग है और ठाकुर की जगह ठाकुर बनने की कवायद है, क्योंकि अभी मनोज ठाकुर अध्यक्ष हैं, जो कभी भी हटाए जा सकते हैं। हालांकि श्याम टेलर को भी पता नहीं है कि नए कब बनेंगे। हेमांग जोशी की हाजिरी में थे, लेकिन फिर मायूस लौटे कि इंदौरी लड़कों ने कुछ खास तवज्जो नहीं दी है, जिन्होंने मान लिया है कि टेलर का कुछ नहीं है। जो भी हो, पर मनोज पटेल की हलचल सुर्खियों में है और क्या ठाकुर की जगह ठाकुर को बनाने की कोशिश कामयाब हो पाएगी!

गुड्डू दिखने लगे हैं अब!

खास खबर

गुड्डू दिखने लगे हैं अब!

रीना बौरासी ने जो सियासी गियर बदला है, उसमें प्रेमचंद गुड्डू को ढूंढा जा सकता है, क्योंकि तेवर और जिद वही है। अभी तक किनारे-किनारे सियासत कर रही थीं, लेकिन राहुल गांधी की गूंज में जो दहाड़ लगाई है, उसने कांग्रेसियों को हैरान कर डाला है। सिर्फ पर्स ही नहीं खोला है, बल्कि सियासी वसूली के लिए जो किया जा सकता है, किया है और कह सकते हैं कि गूंज में जिन नेताओं की गूंज रही है, उसमें रीना शामिल हैं। हालांकि उमंग सिंघार कैंप में चली गई हैं, जो उनके पोस्टर-बैनर और विज्ञापनों में दिखाई दिया है। विपिन वानखेड़े को दरकिनार किया है, कहीं जगह नहीं मिली है और हिसाब बराबर करने के लिए ही सत्यनारायण पटेल और शहर कांग्रेस अध्यक्ष को साथ रखा है। हालांकि सांवेर में जो कांग्रेसी उछल-कूद कर रहे हैं, उनमें से कुछ सत्तू से दम लिए हुए हैं। बावजूद इसके रीना ने नजरअंदाज किया और पहला निशाना विपिन को रखा है। अध्यक्ष से रीना की ठीक-ठाक बन रही है और वहां भी मुकाबला गांव अध्यक्ष से ही है, इसलिए मिल-जुलकर पीछे करने की जुगत लगाई गई है!

पद से बड़ा कद…!

खास खबर

पद से बड़ा कद…!

सम्मान का संबंध पद से नहीं, नेता के आचरण और कद से रहता है। गांधीजी तो कभी प्रधानमंत्री रहे नहीं…उनके कद का नेता है, जो दुनिया में आज भी मिसाल है? अटलविहारी वाजपेयी के आगे प्रधानमंत्री भी बौने नजर आते थे कि विराट थे। प्रधानमंत्री हुए और हट गए, सम्मान में कोई कमी न आई। चालीस बरस बाद भी इंदिरा गांधी लौह महिला हैं। जिस अमेरिका के आगे मौजूदा प्रधानमंत्री लाचार नजर आ रहे हैं, उसे उन्होंने उस समय ठेंगा दिखा दिया था, जब देश आज की तरह मजबूत न था। यह कद का कमाल है, पद से कुछ नहीं होता। अभी नरेंद्र मोदी के लिए होने वाली आलोचना में भाजपा दुहाई देने लगती है, प्रधानमंत्री हैं, उन्हें बख्शा जाए। भाजपा भूल जाती है कि जब वह दुनिया के माने हुए विद्वान मनमोहन सिंह का मजाक बनाती थी, सिंह भी तो उसी पद पर थे, जिसकी दुहाई अब दी जा रही है। जिस कायदे का पालन भाजपा ने नहीं किया, वह उसे अब इसलिए याद आ रहा है कि बचाव में कुछ बचा नहीं। बाकी मोर्चों पर नाकामी, राजनीतिक और प्रशासनिक हो सकती है, व्यवहार में नेता का आचरण कसौटी पर खरा उतरना चाहिए, वही कद बढ़ाता है। इस मामले में नरेंद्र मोदी खरे नहीं उतरते और यही कारण है कि प्रधानमंत्री होकर भी उनके हिस्से गालियां आ रही हैं। याद रखने वाली बात है कि यह सब आम आदमी कर रहा है। उसकी नजर में पद और कद दोनों गौण हो गए तो यह नौबत आ गई! प्रचार के झूटे रवैये ने खीज पैदा की, जो

सिंधिया को काले झंडे... मारा-पीटी हो गई!

खास खबर

सिंधिया को काले झंडे... मारा-पीटी हो गई!

दैनिक भास्कर के पहले पन्ने पर भोपाल की वारदात है कि परिवहन इंस्पेक्टर मीनाक्षी गोखले की उनके प्रेमी पवन द्विवेदी ने हत्या की है। दोनों शादी करना चाहते थे। दो महीने पहले मीनाक्षी का हाथ मांगने पवन, उनके पिता के पास गया था, लेकिन मीनाक्षी ने शादी का फैसला पिता पर छोड़ दिया था। इसके बाद से मीनाक्षी ने पवन से बातचीत बंद कर दी थी और अब कत्ल हो गया। पवन घर लौटा और करीब दो सौ मीटर दूर पेड़ से फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली। उस समय मीनाक्षी की तीन साल की बच्ची और सहेली कृतिका साहू दूसरे कमरे में सो रही थी। पत्रिका ने इसे पहले पन्ने की पहली खबर बनाया है। लिखा है कि शादी करना चाहता था प्रेमी, रिश्ते में खटास आई तो आरटीओ इंस्पेक्टर के सिर पर हथौड़े से तीन-चार बार हमला कर कत्ल कर दिया और फिर बीस मीटर दूर पेड़ पर फंदा लगाकर खुद भी जान दे दी, यानी एक सौ अस्सी मीटर का फर्क है दैनिक भास्कर की खबर से। भोपाल में किराए के मकान में प्रेमी के साथ रहती थी। रात में लड़की और सहेली के साथ लौटी, सुबह लाश मिली। कहीं कितना ही बड़ा मामला क्यों न हो जाए, लेकिन नईदुनिया की चाल में तब्दीली आती नहीं है। पहले पन्ने पर सपाट खबर है और बताया है कि इंदौर निवासी आरटीओ इंस्पेक्टर की हत्या कर प्रेमी ने भी फांसी लगा ली। ऊपर वाले पन्ने की पहली खबर सागर शराब-कांड से बनी है। बड़ी कार्रवाई हुई है और 39 पुलिसवालों को लाइन अटैच किया ह

भाजपा जीते तो बेईमानी, हारे तो चालाकी!

खास खबर

भाजपा जीते तो बेईमानी, हारे तो चालाकी!

देश की राजनीति अब उस मुकाम पर है, जहां चुनाव नतीजे समझने के लिए जादूगर चाहिए। भाजपा जीत जाए तो कहा जाता है कि चुनाव आयोग उसके कब्जे में है और भाजपा हार जाए तो उसने जानबूझकर विपक्ष को जिता दिया ताकि चुनाव आयोग बचा रहे। मतलब भाजपा जीतती भी मर्जी से है और हारती भी। विपक्ष बेचारा केवल जीतने या हारने का ढोंग करता है। पहले चुनाव में उम्मीदवार खड़े होते थे। अब कहानियां खड़ी होती हैं। वोट पड़ने से पहले कहानी, गिनती के दौरान कहानी बदलने को तैयार और नतीजा आने के बाद नई कहानी बाजार में। तथ्य बाद में आते हैं, शक पहले पहुंच जाता है। मान लीजिए भाजपा दस सीटें जीत गई। तुरंत कहा जाएगा, देखा, पूरा खेल तय था। एक सीट हार गई तो कहा जाएगा, जानबूझकर छोड़ी है। पांच हार गई तो कहा जाएगा कि जनता का गुस्सा ठंडा करने के लिए विपक्ष को ऑक्सीजन दी है। सरकार ही बदल जाए तो शायद कहा जाएगा कि सत्ता से हटना भी भाजपा की चाल है। भाजपा कोई राजनीतिक दल नहीं, ब्रह्मांड की ताकत है। बारिश कम हो तो उसकी योजना, ज्यादा हो तो चाल। विपक्ष जीते तो भाजपा की मेहरबानी, विपक्ष हारे तो भाजपा की ताकत। मतदाता केवल अंगूठा लगाने वाला कलाकार है, पटकथा कहीं और लिखी जाती है। ऐसी राजनीति में सबसे बड़ा अपमान चुनाव आयोग का नहीं, मतदाता का होता है। जनता से कह रहे हैं कि तुम्हारा वोट मायने नहीं रखता। तुमने किसी उम्मीदवार को जिताया नहीं, सिर्फ यह भ

कौन हैं ये... कहां से आते हैं

खास खबर

कौन हैं ये... कहां से आते हैं

हम दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश की जनता हैं। पसंद के सांसद और विधायक चुनते हैं, फिर इन्ही में से मंत्री बनते हैं। इनके काम और जवाबों को सुनते हैं तो खुद से सवाल करने का मन करता है। बिहारी मंत्री श्रवण कुमार से चीनी के बढ़ते दाम की वजह पूछा तो उनका जवाब था- चीनी के बढ़ते दाम से कोई फर्क पड़ने वाला नहीं, लोग कम चीनी खा रहे हैं। आजकल तो सब डाइबिटीज के मरीज हैं। सोचने लगा, क्या इस तरह के जवाब देने की कला सिखाने के लिए अलग क्लास लगाई जाती है । बिहार के एक और नेता मिले कि हमारा मिशन हो कि बिहार और देश को इतना सख्त बना दें कि नेशनल कालेज और अस्पताल बंद होने के कगार पर पहुंच जाएं। इनको सुनते ही मन में ये मीम आ गया ‘अरे कहना क्या चाहते हो।’ राजस्थान में स्कूल की समस्या पर बच्चे विरोध कर रहे थे। मंत्री ने लड़की से पूछा- आप कौन-सी क्लास में पढ़ती हो, उसने कहा टेंथ में। फौरन मंत्री बोले- ओह मैं दसवीं समझा। शिक्षा मंत्री की बात कर रहा हूं। बिहार के जो सेहत मंत्री हैं, ठीक से खड़े भी नहीं हो पाते हैं। इनके जवाब सही हों न न हों, दिलचस्प जरूर होते हैं। ये सवाल सुन कर ज्ञानी लोगों की मुद्रा में सोचते हैं और जब जवाब आता है तो लगता है इतनी देर और ये सोचा। मनोज तिवारी हैं न। उनसे पूछा कि दिल्ली के लिए आप के पास क्या प्लानिंग है। जवाब दिया- हमारे पास ऐसा प्लानिंग तैयार है, जिससे दिल्ली की लाखों

पटवारी-नायडू की लड़ाई मार गई!

खास खबर

पटवारी-नायडू की लड़ाई मार गई!

राहुल गांधी की दिल्ली टीम और उषा नायडू ने गूंज का गला घोंटने में कसर नहीं छोड़ी थी। यहां तक कि होटल रेडिसन में जीतू पटवारी से उषा की तीखी बहस हो गई। हरीश चौधरी ने दखल दिया तो उनसे भी कहासुनी हो गई। दोनों बोलते रहे, लेकिन उषा सुन नहीं रही थीं। इसके बाद जो खेल बिखरा तो आखिरी तक संभल नहीं पाया। कई नेता नाराज हो गए और पुराने मंत्री पीसी शर्मा होटल छोड़ भोपाल ही चले गए। पंडाल पर राहुल की टीम ने कब्जा जमा लिया था और जीतू पटवारी की नहीं सुनी। प्रेस कांफ्रेंस में पीछे से ठोक-पीट की आवाज आ रही थी, जिसे रोकने के लिए पटवारी ने कहा तो ठेकेदार ने बोल दिया कि मनोज त्यागी बोलेंगे, तभी काम रोकेंगे। सारे इंतजाम दिल्ली टीम के पास थे, जिससे इंदौर के कांग्रेसी नाराज रहे। नेताओं के लिए जो बॉक्स बनाया गया था, उसमें कई तरह की गड़बड़ थी। यहां तक कि दिग्विजयसिंह चौथी-पांचवीं कतार में बैठे थे। फिर ‘पास’ को लेकर खूब हंगामा हुआ। सबको मिले नहीं और फर्जी भी बने। कुछ ने पास की डुप्लीकेट कॉपी निकलवा ली और खूब चले। राहुल गांधी से कांग्रेसियों को मिलवाने की जिम्मेदारी उषा नायडू के पास थी। उन्होंने पहले तो सबसे कह दिया था कि किसी को मायूस नहीं करेंगे, सबको मिलाया जाएगा और ज्यादातर को होटल बुला लिया था। आखिरी समय पर बोल दिया कि सिर्फ विधायकों और कुछ संगठन वालों को मिलवाया जाएगा, जिससे इंदौरी नेता उखड़ गए। जब इस तरह क