कौन हैं ये... कहां से आते हैं

· Indore

कौन हैं ये... कहां से आते हैं

हम दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश की जनता हैं। पसंद के सांसद और विधायक चुनते हैं, फिर इन्ही में से मंत्री बनते हैं। इनके काम और जवाबों को सुनते हैं तो खुद से सवाल करने का मन करता है।

बिहारी मंत्री श्रवण कुमार से चीनी के बढ़ते दाम की वजह पूछा तो उनका जवाब था- चीनी के बढ़ते दाम से कोई फर्क पड़ने वाला नहीं, लोग कम चीनी खा रहे हैं। आजकल तो सब डाइबिटीज के मरीज हैं। सोचने लगा, क्या इस तरह के जवाब देने की कला सिखाने के लिए अलग क्लास लगाई जाती है । बिहार के एक और नेता मिले कि हमारा मिशन हो कि बिहार और देश को इतना सख्त बना दें कि नेशनल कालेज और अस्पताल बंद होने के कगार पर पहुंच जाएं। इनको सुनते ही मन में ये मीम आ गया ‘अरे कहना क्या चाहते हो।’

राजस्थान में स्कूल की समस्या पर बच्चे विरोध कर रहे थे। मंत्री ने लड़की से पूछा- आप कौन-सी क्लास में पढ़ती हो, उसने कहा टेंथ में। फौरन मंत्री बोले- ओह मैं दसवीं समझा। शिक्षा मंत्री की बात कर रहा हूं। बिहार के जो सेहत मंत्री हैं, ठीक से खड़े भी नहीं हो पाते हैं। इनके जवाब सही हों न न हों, दिलचस्प जरूर होते हैं। ये सवाल सुन कर ज्ञानी लोगों की मुद्रा में सोचते हैं और जब जवाब आता है तो लगता है इतनी देर और ये सोचा। मनोज तिवारी हैं न। उनसे पूछा कि दिल्ली के लिए आप के पास क्या प्लानिंग है। जवाब दिया- हमारे पास ऐसा प्लानिंग तैयार है, जिससे दिल्ली की लाखों की जमीन करोड़ों की हो जाएगी। जब कहा कि फिर तो बिहार से जो दिल्ली आते हैं, कभी मकान नहीं खरीद सकते। मनोज थोड़ा सकपका कर कहने लगे- अरे ये तो गलत हो गया, फिर से सोचना पड़ेगा। शायद वह फिल्म का सेट समझ रहे हों, जहां गलती होने पर रीटेक की सुविधा रहती है।

रवि किशन तो और भी गजब हैं। जब अजीत पंवार का प्लेन क्रैश हुआ तो चेहरे पर घबराहट थी और लगभग भागते जवाब दिया- अरे लेट हो रहा हूं। ऐसा लगा कि प्लेन का मलबा यही हटाएंगे । शमशान घाट उद्घाटन में ऐसा भाषण दिया कि आदित्यनाथ भी खिलखिला कर हंसने लगे। कहने लगे- अगर मौत के बाद यहां जलाए जाओगे तो सीधा स्वर्ग में जाओगे, कितना आनंद आएगा यहां जलने में, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम है। लगता है मुंबई में कॉमेडी फिल्में कम बनने का कारण ये भी है ।

अकसर इन महान आत्माओं की रील बनाने वाले अरशद वारसी मीम लगा देते- कौन हैं ये, कहां से आते हैं। आज जवाब दे ही देते हैं, ये हमारे नेता हैं, हम ही इनको चुन के लाते हैं।