पटवारी-नायडू की लड़ाई मार गई!

· Indore

पटवारी-नायडू की लड़ाई मार गई!

राहुल गांधी की दिल्ली टीम और उषा नायडू ने गूंज का गला घोंटने में कसर नहीं छोड़ी थी। यहां तक कि होटल रेडिसन में जीतू पटवारी से उषा की तीखी बहस हो गई। हरीश चौधरी ने दखल दिया तो उनसे भी कहासुनी हो गई। दोनों बोलते रहे, लेकिन उषा सुन नहीं रही थीं। इसके बाद जो खेल बिखरा तो आखिरी तक संभल नहीं पाया। कई नेता नाराज हो गए और पुराने मंत्री पीसी शर्मा होटल छोड़ भोपाल ही चले गए।

पंडाल पर राहुल की टीम ने कब्जा जमा लिया था और जीतू पटवारी की नहीं सुनी। प्रेस कांफ्रेंस में पीछे से ठोक-पीट की आवाज आ रही थी, जिसे रोकने के लिए पटवारी ने कहा तो ठेकेदार ने बोल दिया कि मनोज त्यागी बोलेंगे, तभी काम रोकेंगे। सारे इंतजाम दिल्ली टीम के पास थे, जिससे इंदौर के कांग्रेसी नाराज रहे। नेताओं के लिए जो बॉक्स बनाया गया था, उसमें कई तरह की गड़बड़ थी। यहां तक कि दिग्विजयसिंह चौथी-पांचवीं कतार में बैठे थे। फिर ‘पास’ को लेकर खूब हंगामा हुआ। सबको मिले नहीं और फर्जी भी बने। कुछ ने पास की डुप्लीकेट कॉपी निकलवा ली और खूब चले।

राहुल गांधी से कांग्रेसियों को मिलवाने की जिम्मेदारी उषा नायडू के पास थी। उन्होंने पहले तो सबसे कह दिया था कि किसी को मायूस नहीं करेंगे, सबको मिलाया जाएगा और ज्यादातर को होटल बुला लिया था। आखिरी समय पर बोल दिया कि सिर्फ विधायकों और कुछ संगठन वालों को मिलवाया जाएगा, जिससे इंदौरी नेता उखड़ गए। जब इस तरह का फरमान जारी हुआ, तब होटल में पीसी शर्मा सहित प्रदेश के कई पुराने नेता मौजूद थे, लेकिन किसी की बात सुनने को उषा तैयार नहीं थीं।

असल में जब राहुल गांधी इंदौर आए हैं, शहर और प्रदेश कांग्रेस से लिस्ट दी जाती रही है और उसके मुताबिक नेता मिलते रहे हैं, लेकिन नायडू ने लिस्ट लेने से इनकार कर दिया था। पटवारी ने समझाने की कोशिश की तो उनसे बहस हो गई और हरीश चौधरी से भी दो-दो हाथ करने को तैयार थीं। फिर कुछ नेताओं को उन्होंने साथ कर लिया था। उमंग सिंघार, अरुण यादव और सत्यनारायण पटेल सहित दो-तीन को फायदा मिला, जिनकी हर बात सुनी गई। राहुल की टीम में बायजू सहित कुछ साउथ से हैं और उषा भी उधर से आती हैं। इसलिए सब साथ हो लिए और इंदौरियों का खूब शिकार हुआ।

एयरपोर्ट पर राहुल से मिलने के लिए चालीस की लिस्ट थी, जिनमें आधे तो दिल्ली वाले थे। इंदौरी नेता कहते रहे कि ये राहुल से मिलते रहते हैं, इन्हें एयरपोर्ट पर मिलवाने का क्या मतलब है। शहर कांग्रेस अध्यक्ष सहित कई ताकते रह गए और जब पीसी शर्मा जैसे नेता की दाल नहीं गली तो बाकी के लिए गुंजाइश ही नहीं थी। पीसी ने नाराजगी में अपनी बहू को फोन लगा दिया कि नहीं रुकना है, भोपाल चलना पड़ेगा, जो रीना बौरासी के साथ सियासत कर रही हैं। जैसे-तैसे उन्होंने इधर-उधर के बहाने बनाकर खुद को रोका।

हरीश चौधरी के पीए चेतन मेघवाल ने एयरपोर्ट वाली लिस्ट में नाम जुड़वा लिया था कि कौन रोक लेगा, लेकिन उषा नायडू ने उन्हें दूर कर दिया। सारी कोशिश के बावजूद चेतन को जगह नहीं मिली। पटवारी से उषा की पहले दिन से नहीं बन रही है और दिल्ली से जो उन्हें ताकत मिली है, उसके दम पर अध्यक्ष से दो-दो हाथ करती रहती हैं। पटवारी को पता था कि चारों तरफ से खेल बिगड़ता जा रहा है, इसलिए गर्दन नीचे कर लगे थे। विपिन वानखेड़े पर उषा लगातार हमले कर रही हैं, क्योंकि सत्यनारायण पटेल ने साध लिया है। तभी तो कई बड़े नेता इधर-उधर धक्के खा रहे थे और बंटी राठौर जैसे राहुल के करीब पहुंच गए थे। राधेश्याम पटेल को विपिन की जगह अध्यक्ष बनाने की मुहिम को उषा ही ताकत दे रही हैं कि बदलाव का

समय आ गया है। यही वजह है कि विपिन ने जो किया, उसे रोकने के लिए पूरा दम लगाया गया और आखिरकार कामयाब रहीं कि गांव के नेताओं को उड़ा दिया। इंदौर के ब्लॉक अध्यक्षों की नाराजगी को कल खामोश करने की कोशिश हुई और उषा नायडू ने मीटिंग में वादा किया कि जल्द ही राहुल गांधी से सबको मिलवाएंगी। वो तो गूंज में आई भीड़ ने इंतजामियों पर परदा डाल दिया, वरना कसर छोड़ी नहीं गई थी। पंडाल से लेकर होटल तक रायता ही रायता था!