क्यों छूट जाते हैं कई अमीर लोग?

01. किसान परिवारों के पास पीढ़ियों से चली आ रही खेती की जमीन है। रियल एस्टेट निवेशकों के पास बड़े लैंड बैंक हैं, जो अभी विकसित नहीं हुए हैं। किताबों (बुक वैल्यू) में उसकी कीमत नहीं दिखती है, लेकिन मार्केट वैल्यू अरबों में हो सकती है। अगर ये संपत्ति लिस्टेड कंपनी या ट्रैक होने वाली फर्म के जरिए नहीं हैं, तो हूरुन नहीं गिन पाता। मार्केट वैल्यू का अनुमान लगाना मुश्किल हो जाता है जब हालिया लेन-देन उपलब्ध न हों। आम किसान परिवार या रियल एस्टेट निवेशक असल में अरबों रुपये की संपत्ति का मालिक हो सकता है।
02. बहुत से लोग जानबूझकर दौलत नजरों से दूर रखते हैं। कंपनियों को अनलिस्टेड रखते हैं और संपत्ति को कई सदस्यों या ट्रस्ट में बाँट देते हैं। नकद, सोना-जेवर, कला संग्रह या क्रिप्टोकरेंसी सूची में शामिल करना असंभव है। विरासत वाली संपत्ति भी ऐसी ही होती है। परिवार की कुल दौलत बहुत बड़ी हो सकती है, लेकिन अगर वह कई नाम और संस्था में बंटी है, तो उसे पूरी तरह नहीं पकड़ पाते। लोग ऑफशोर ट्रस्ट, शेल कंपनियाँ और विदेश की कंपनियों के जरिए अपनी संपत्ति को इतना पेचीदा बना देते हैं कि पता लगाना नामुमकिन है।
लिस्टेड कंपनी के बड़े शेयरहोल्डर की दौलत शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव से तय होती है। शेयर गिरे तो नेट वर्थ भी गिर जाती है। वहीं जिसके पास बड़े शहर के आसपास एकड़ो में विकसित होने योग्य जमीन है, या ऑफशोर में बड़ी नकदी और कला संग्रह है, उसकी असली संपत्ति कहीं ज्यादा मजबूत और बड़ी हो सकती है। सूची में शामिल व्यक्ति के पीछे शायद दो और ऐसे लोग होते हैं, जिन्हें ढूंढ नहीं पाते। जहां संपत्ति के रिकॉर्ड पारदर्शी नहीं हैं।
इंदौर में कई हैं जिनके पास हजारों करोड़ रुपये का लैंड बैंक है। कुछ कारोबारियों की होटल, अस्पताल और मॉल जैसी संपत्तियाँ भी हैं। C21 ग्रुप ने इंस्टाग्राम पर अपनी संपत्ति आम की... वह हजारों-करोड़ में नहीं? ये नाम अक्सर शामिल नहीं होते, क्योंकि उनकी ज्यादातर संपत्ति, पुरानी जमीन या अलग-अलग कंपनी में दर्ज है। ट्रैक होने वाले शेयर या कंपनी वैल्यूएशन नहीं होने से असली दौलत रह जाती है, भले ही शामिल नाम से कहीं अधिक हो।
हुरुन इंडिया से मयूर ने बताया कि कंपनियां सीए सर्टिफिकेट के ज़रिए एक हज़ार करोड़ की वैल्यूएशन बता सकती हैं और सूची में नाम शामिल करवा सकती हैं। निजी संपत्ति का आकलन मुश्किल है, इसलिए कई रियल एस्टेट निवेशक छूट जाते हैं।