(बे)पटरी... पटवारी!

· Indore

(बे)पटरी... पटवारी!

यदि सरकारी जमीन पर कब्जे की रजिस्ट्री का हक पटवारी को ही मिल जाएगा तो बाकी अमले की जरूरत क्या है! पटवारी ने सही किया या गलत, यह कौन तय करेगा! यदि उसने गलत कर दिया तो क्या उसे गड़बड़ी का जिम्मेदार नहीं माना जाएगा? ये सवाल हैं, जो सरकार से पटवारी पूछ रहे हैं और मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि आप पर कोई आंच नहीं आएगी। जमीन की मिल्कियत आम बात नहीं है और यह तय करने का अधिकार पटवारी के जिम्मे वाजिब नहीं। पता नहीं, सरकार को क्या सूझा कि लाखों कब्जों और पट्टों की रजिस्ट्री की सनक सवार हो गई। सही-गलत की चिंता से दूर लाखों मामले रजिस्ट्री में तब्दील कर वोट की जुगाड़ तो हो सकती है, लेकिन कायदे का राज नहीं रह सकता। यदि ये कब्जे और पट्टे वाजिब होते तो मिल्कियत के लिए बचे नहीं रहते। वाजिब मामलों में सही फैसले रजिस्ट्री तक पहुंचते हैं और वह अफसर नहीं, मूल मालिक कराता है।

प्रदेश के पटवारियों की चिंता सही है कि यह जिम्मेदारी बड़े अधिकारियों को लेनी चाहिए कि मिल्कियत वे तय करें। रजिस्ट्री भी एडीएम से नीचे करने का हक नहीं देना चाहिए। ऐसी धांधली कभी अर्जुनसिंह ने भी की थी कि जो जहां काबिज है, पट्टे दे दिये थे। इतनी सावधानी बरती थी कि रजिस्ट्री नहीं करवाई थी। मिल्कियत सरकार की ही रखी थी। केवल रहने का हक दिया था। यह सरकार तो मालिक बनाने पर तुल गई और भूल गई कि जो लोग सरकारी जमीन पर कब्जा नहीं कर वैध मकान बनाते हैं, उनकी गलती क्या है? क्या सही करने का यही इनाम है कि घाटे में रहें। इससे तो कानून का पालन करने से बचेंगे लोग और गलत करेंगे कि आखिर में सरकार मालिक बना तो देगी! सरकार के पास इस बात का क्या जवाब है कि यदि किसी पटवारी ने किसी को गलत मालिक बना दिया तो क्या होगा? पटवारी गलत रहेगा या नहीं और सरकार वो रजिस्ट्री कैंसल करेगी या नहीं!