अपनी गली के मीर...!

· Indore

अपनी गली के मीर...!

अफगानिस्तान को बल्लेबाजी पर इतना भरोसा था कि टॉस जीत पहले गेंदबाजी चुन ली। ओस से आस ढूंढ रहे थे, अभिषेक शर्मा ओले की तरह टूट पड़े। अफगानिस्तान पहले दस ओवर में ही मैच हार गया था। बाद का वक्त तो काटा गया। पिच पाटा था, लेकिन एक ही जगह लगातार तीसरा मुकाबला होने की वजह से जल्द ही टूट गया। सूखा होने की वजह से गेंद रिवर्स ले रही थी। ऐसी शुरुआत के बाद भारत को तीन सौ बनाना थे, लेकिन आखिरी पांच ओवर में तरस गए।

अफगानी गेंदबाजों की गेंद भले ठिकाने पर नहीं गिरी, लेकिन निशाने सटीक थे। शुरुआत राशिद खान ने की, फिर गुरबाज ने तुक्का और इब्राहिम जादरान ने भी काम दिखाया। निशानेबाजी की वजह से भारत को वक्त पर रोक लिया, लेकिन स्कोर बोर्ड पर उतने रन टंग चुके थे कि भारत को मैच निकालने के लिए मशक्कत नहीं करना थी। मदद अफगानी बल्लेबाजों ने की। मैराथन दौड़ने के लिए शुरू से ही चौथा गिएर लगा दिया। अक्षर पटेल ने आते ही अस्थि-पंजर खोल दिए।

यूं लग रहा था कि अफगानिस्तान पिछले मुकाबले के रन भी बनाने आई है। बुमरा को ओवर पूरे करने की नौबत ही नहीं आई। नीतिश कुमार रेड्डी ने ही घेर दिया। रवि विश्नोई ने हाथ साफ किए तो यश ठाकुर के लिए भी शुरुआत अच्छी हो गई। रवींद्र जाडेजा के वन-डे टीम में आते ही अक्षर पटेल की गेंदबाजी ठिकाने पर आ गई है। अफगान शुरुआत डराने वाले थी, लेकिन अक्षर ने जैसे ही दो को चलता किया, बाकी भरभरा कर गिर पड़े।

विदेशी सरजमीं पर यही खेल भारत की मुसीबत बनता है। यहां तो अभिषेक, संजू और बाकी का बल्ला सोंटा बन जाता है, लेकिन जैसे ही मुश्किल पिच आती है या हरियाली के दर्शन होते हैं तो सोंटा, मोगरी में बदल जाता है। आयरलैंड से निपटे थे तो भारत में भी गेंदबाजों की मददगार पिच देने की बात हुई थी कि भारतीय बल्लेबाजों में भी आदत पनपे, पर हम बाजार के आगे पस्त हैं।