हटना तो दूर... हिलेंगे भी नहीं ज्ञानेश कुमार

नई दिल्ली। ज्ञानेश कुमार (मुख्य चुनाव आयुक्त) तभी कुर्सी से हटेंगे, जब वे खुद इस्तीफा दें। उन्हें हटाना तो नामुमकिन जैसा है। छह माह पहले लोकसभा और राज्य सभा के सांसदों ने दस्तखत कर पहली कोशिश की थी, लेकिन सदन के मुखिया ने उस अर्जी को खारिज कर दिया।
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग की तैयारी बताई जा रही है। पहली सीढ़ी ये है कि लोकसभा में 100 और राज्य सभा में कम से कम 50 सांसद उनके खिलाफ वोट करें। वो अर्जी अगर स्पीकर और सभापति मान भी लें, तो जांच समिति बनेगी, जिसमें सुप्रीम कोर्ट और हाइकोर्ट के जज… एक कानूनी जानकार रहेंगे। उनकी रिपोर्ट भी खिलाफ आ जाए, तो ज्ञानेश कुमार को अपनी बात रखने का मौका मिलेगा। फिर भी अगर नाकामी (अक्षमता) और बेईमानी (कदाचार) साबित हो जाए, तो प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। फिर दोनों सदन में दो-तिहाई समर्थन चाहिए। वहां से भी हरी झंडी मिल जाए, तो राष्ट्रपति के पास बात जाएगी। उनका आदेश होने के बाद ही ज्ञानेश कुमार को हटाया जा सकता है। कुल मिला कर, कठिन और लंबी प्रक्रिया है। एक-एक जगह से हरी झंडी जरूरी है, जो कि मुश्किल है।