सीमा जापान में, मां को खबर नहीं

· Indore

सीमा जापान में, मां को खबर नहीं

सीमा की मां केसरी देवी हिमाचल प्रदेश के रेटा गाँव में दौड़ते हुए टीवी पर देख रही थीं, जिसका आधा हिस्सा मिट्टी की दीवारों वाला है और बाकी सीमेंट से बना है। उन्हें नहीं पता था कि सीमा जापान में हैं। सीमा बोलीं, मां की उम्र हो गई है। विदेश की बात करो तो घबरा जाती हैं।

सीमा के भाईयों ने दिहाड़ी मजदूरी कर खेलाया है। पिता के पास जूते दिलाने के पैसे नहीं थे तो एक बकरी बेच दी। 2012 में साँप के काटने से गुजर गए थे। पिता को खोने के बाद भी सीमा का दौडऩा जारी रहा। भाई सुरेंद्र के साथ प्रैक्टिस करती थीं। 2015 में धर्मशाला साइ के ट्रायल में शामिल होने के लिए सीमा के पास जूते नहीं थे तो भाइयों ने एक और बकरी बेच दी।

छह भाई-बहनों में सबसे छोटी हैं। 2010 से ही दौड़ रही हैं। सरकारी स्कूल के पीटी टीचर हंसराज ने प्रतिभा पहचानी। पहाड़ी रास्तों से होकर भागते हुए स्कूल जाती थीं। वहीं से पैरों में जान आई और अब देश के लिए पदक ला रही हैं।