जैसा कहा था... वैसा कर दिखाया!

· Indore

जैसा कहा था... वैसा कर दिखाया!

इंदौर से कुछ दूर बेटमा में डोल ग्यारस पर 6 झांकियां निकलीं, 10 अखाड़े साथ चले, लेकिन कोई डीजे नहीं बजा। सड़क पर सिर्फ ढोल की थाप सुनाई दी और अखाड़ों के कलाकार करतब दिखाते रहे।

दो दिन पहले शांति समिति की बैठक में तय कर लिया था कि चल समारोह में डीजे नहीं बजेगा। कल जब झांकियां निकलीं तो फैसला जमीन पर भी दिखाई दिया। न तेज आवाज, न कान फोड़ने वाला शोर और न डीजे की होड़। छह झांकियों और दस अखाड़ों का जुलूस रात दो बजे तक चलता रहा और लोगों ने आराम से देखा।

बेटमा थाने में हुई शांति समिति की बैठक में विधायक मनोज पटेल और पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष धर्मवीर सिंह चौहान ने विचार रखा कि अगर डीजे पर पाबंदी लगा दी जाए तो। बैठक में 100 से ज्यादा लोग मौजूद थे। अलग-अलग समाज और धर्म के लोगों ने एक सुर में कहा कि सिर्फ बेटमा के डोल ग्यारस चल समारोह में हमेशा के लिए डीजे बंद होना चाहिए। लोगों का कहना था कि डीजे की तेज आवाज न परंपरा है और न ही किसी को खास खुशी मिलती है। कुछ नई उम्र के लड़के जरूर डीजे पर मस्ती करते हैं, लेकिन इसका पुराने समय की डोल ग्यारस की झांकियों से कोई लेना-देना नहीं है।

फैसला लिया कि अब बेटमा में डोल ग्यारस ही नहीं, दूसरे मौके में भी डीजे नहीं बजाया जाएगा। विधायक मनोज पटेल ने साफ कहा कि चाहे चुनावी रैली हो या चल समारोह, बेटमा में अब डीजे नहीं बजेगा। नीरज खंडेलवाल बताते हैं कि तीन साल से यह कोशिश थी। इस बार करीब महीनेभर पहले ही विधायक मनोज पटेल को राजी कर लिया था कि शांति समिति की बैठक में गांव की सहमति से फैसला होगा।

नीरज बताते हैं कि हम बचपन से इंदौर में झांकी देखने आते हैं, लेकिन यहां तेज डीजे से अब महिलाओं ने आना बंद कर दिया है। पहले बेटमा में भी यही हाल था। घर की महिलाएं कानफोड़ू आवाज के कारण घर से नहीं निकलती थीं। जो महिलाएं बरसों से झांकी देखने नहीं आईं, वे भी सड़क पर घूम रही थीं। दो दिन पहले इंदौर में कलेक्टर शिवम वर्मा और नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह के सामने सवाल रखा था कि क्या डीजे पर रोक लगाई जा सकती है।

तय हुआ कि इस बार सीमा तक ही आवाज वाले साउंड सिस्टम चलाए जाएंगे। पिछली बार भी ऐसा ही फैसला हुआ था, लेकिन नगर निगम चौराहे का डीजे राजवाड़ा तक सुनाई दे रहा था और राजवाड़ा का डीजे खजूरी बाजार तक गूंजता रहा। ऐसे में बेटमा का डीजे-मुक्त डोल ग्यारस इंदौर के सामने सवाल छोड़ गया है—क्या इंदौर में भी झांकी का मजा ढोल की थाप और झांकियों की रोशनी में लिया जा सकता है!