डर बढ़ते ही टूट जाता है शेयर बाजार!

मुंबई। शेयर बाजार में रोज उतार-चढ़ाव होता है, लेिकन गिरावट अचानक नहीं दिखती, जब निवेशकों का भरोसा टूटता है तो बिकवाली की रफ्तार बाजार को कुछ ही समय में नीचे ला सकती है। साल 1992, 2008 और 2020 ऐसे उदाहरण हैं, जब अलग-अलग संकटों ने बाजार में भारी गिरावट ला दी। इन घटनाओं से पता चलता है कि बाजार में तेजी के बाद डर फैलते ही हालात कितनी तेजी से बदल सकते हैं।
1992 में हर्षद मेहता से जुड़े मामले का खुलासा होने के बाद निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ। लोगों ने तेजी से शेयर बेचे और 28 अप्रैल को सेंसेक्स करीब 12.77 फीसद गिर गया। 2008 में अमेरिका का घर और बैंकिंग क्षेत्र का संकट पूरी दुनिया में फैल गया। लेहमैन ब्रदर्स के डूबने के बाद बाजार में डर बढ़ा। मार्च 2009 तक सेंसेक्स जनवरी 2008 के ऊंचे स्तर से करीब 61 फीसद नीचे आ गया। 2020 में कोरोना महामारी से कारोबार और आर्थिक गतिविधियां रुक गईं। 23 मार्च को सेंसेक्स करीब 13.2 फीसद गिरा। बाद में सरकारी मदद और टीके की उम्मीद से बाजार संभल गया।
निवेशकों के लिए सीख- बाजार कब गिरेगा, यह कोई निश्चित रूप से नहीं बता सकता। इसलिए निवेश करने से पहले कंपनी की कमाई, कर्ज और शेयर के भाव को जरूर देखना चाहिए। संकट आने पर बाजार बहुत तेजी से गिर सकता है।